फिल्म सुहाग सिन्दूर (1961) से लता मंगेशकर का एक भूला हुआ लेकिन अच्छा गीत । संगीत चित्रगुप्त द्वारा रचित है। लिरिक्स राजिंदर कृष्ण के हैं। फिल्म में बलराज साहनी, माला सिन्हा, मनोज कुमार प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म से एक तलत महमूद लता मंगेशकर की युगल गीत पोस्ट किया है: जो मैं छोटी सी होती है बदरिया जो मैं छोटी सी होती है बदरिया किसी प्यासे की प्यास बुझाते जो मैं चंदा की होती चंदनिया होती जो मैं चंदा की होती चंदनिया तो जमी पे उजाले बिछाट्स जो मैं छोटी सी हरियाली होती बहार तो मैं आके न जाता होता बहार तो मैं आके न जाता बाघों की दुनिया सदा मुस्कुराती बाघों की दुनिया सदा मुस्कुराती चंपा चमेली कही गेंदा गुलाब लगाकर फूल फूल सजा देती जो मैं छोटी सी होती बदरिया किसी प्यासे की प्यास बुझा जो मैं छोटी सी होती बदरी होती है पावन तो मैं धीरे धीरे से बहती होती पावन तो मैं धीरे से बहती विरहन से प्रीतम का संदेश कहती विरहन से प्रीतम का संदेश कहती करले ...
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Lata Mangeshkar and Madan Mohan have produced lots of memorable songs. Some became popular and are remembered by aficionados of the Hindi film music of '50s and '60s. This is perhaps a lesser known song, from Dulhan Ek Raat Ki (1966). Lyrics are by Raja Mehdi Ali Khan. कई दिन से जी है बेकल ऐ दिल की लगन अब ले चल मुझे भी वहाँ मेरे पिया है जहाँ बिछड़ी नज़र नज़र से तो बेचैन हो गई ऐसे लगा के जैसे कोई चीज़ खो गई अब उनके बिना हूँ ऐसे जैसे नैना बिन काजल कई दिन से ... आती हैं उनके प्यार की मौजें मचल-मचल कब तक कहूँगी दिल से मैं अपने सम्भल-सम्भल जा देस पिया के उड़ जा तू मन के पंछी घायल कई दिन से ... आई जो उनकी याद तो साँसें महक गईं आँखों में बिजलियाँ सी हज़ारों चमक गईं जिस ओर उठीं ये नज़रें लहराए प्यार के बादल कई दिन से ...
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तलत महमूद और मदन मोहन ने इस गीत में जहान आरा (1964) से उत्कृष्टता प्राप्त की । इस फिल्म में मुख्य तेरी नज़र का सुरूर हम और तेरी आंखें अनसो और तलत और वो चुप रहें तो मेरे और हल -ए-दिल ये नहीं सुनैया लता सहित कई बेहतरीन गाने थे । जहान आरा शाहजहाँ की बेटी थी और कहानी मिर्ज़ा यूसुफ़ चेंजज़ी के लिए उसके प्यार के बारे में है, जिसे उसे मुगल राजकुमारी के रूप में छोड़ना पड़ा था। इसमें पृथ्वीराज कपूर ने शाहजहाँ की भूमिका निभाई थी और माला सिन्हा ने जहाँआरा की भूमिका निभाई थी और भारत भूषण ने मिर्ज़ा की भूमिका निभाई थी। संगीत मदन मोहन द्वारा रचित है और गीत राजिंदर कृष्ण द्वारा हैं। हालांकि, फिल्म बड़ी फ्लॉप रही। ऑडियो लिंक फिर वोही शाम वही ग़म वही तनहाई है दिल को समझाने तेरी याद चली आई है फिर तव्वुर आपकी पहलू में बिठा करेगा फिर गया वक़्त घड़ी भर को पलटेंगे दिल बहल करेंगे आखिरकार ये तो नायइ है फिर वोही शाम - जाने अब तुझ से मुलाक़ात हो न हो के कभी जो अधूरी रहे वो बात कभी हो के न ह...
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गुमनाम हैं कोई - Gumnaam Hai Koi Lyrics from Gumnaam फिल्म / एल्बम : गुमनाम (1965) संगीत दिया है: जयकिशन दयाभाई पंचाल गीत के बोल: हसरत जयपुरी गायक: लता मंगेशकर गुमनाम हैं कोई बदनाम हैं कोई किसको खबर कौन हैं वह अनजान हैं कोई (2) गुमनाम हैं कोई.. किसको समजे हम अपना कल का नाम हैं एक सपना (2) आज अगर तुम जिन्दा हो तोह कल के लिए के लिए माला जपना गुमनाम हैं कोई बदनाम हैं कोई किसको खबर कौन हैं वह अनजान हैं कोई गुमनाम हैं कोई पल दो पल की मस्ती हैं बस दो दिन की बस्ती हैं (2) चैन यहाँ पर महंगा हैं और मौत यहाँ मौत यहाँ पर सस्ती हैं गुमनाम हैं कोई बदनाम हैं कोई किसको खबर कौन हैं वह अनजान हैं कोई गुमनाम हैं कोई कौन बला तूफ़ानी हैं मौत को खुद हैरानी हैं (2) आये सदा विरानो से जो पैदा हुवा पैदा हुवा वह पनि हैं गुमनाम हैं कोई बदनाम हैं कोई किसको खबर कौन हैं वह अनजान हैं कोई (2) गुमनाम हैं कोई...
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दिलबरो - Ungli Pakad Ke Tune Lyrics from Raazi फिल्म / एल्बम : राज़ी (2018) संगीत दिया है: शंकर-एहसान-लॉय गीत के बोल: गुलज़ार गायक: हर्षदीप कौर, शंकर महादेवन ब छसे खान मज कूर द्यु म रुखसात म्यान बोय जानो (2) ब छसे खान मज कूर उंगली पकड़ के तूने चलना सिखाया था ना दहलीज़ ऊँची है ये पार करा दे बाबा मैं तेरी मलिका टुकड़ा हूँ तेरे दिल का इक बार फिर से दहलीज़ पार करा दे मुड़ के ना देखो दिलबरो दिलबरो मुड़ के ना देखो दिलबरो मुड़ के ना देखो... फसलें जो काटी जायें, उगती नहीं हैं बेटियाँ जो ब्याही जाएँ, मुड़ती नहीं हैं ऐसी बिदाई हो तो, लंबी जुदाई हो तो दहलीज़ दर्द की भी पार करा दे बाबा मैं तेरी मलिका... मेरे दिलबरो बर्फें गलेंगी फिर से मेरे दिलबरो फसलें पकेंगी फिर से तेरे पाँव के तले मेरी दुआ चले दुआ मेरी चले उंगली पकड़ के तूने...
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ऐ वतन वतन मेरे - Ae Watan Watan Mere Abad Lyrics from Raazi फिल्म / एल्बम : राज़ी (2018) संगीत दिया है: शंकर-एहसान-लॉय गीत के बोल: गुलज़ार, अल्लमा इकबाल गायक: अरिजीत सिंह, सुनिधि चौहान ऐ वतन... मेरे वतन... ऐ वतन आबाद रहे तू आबाद रहे तू ... (2) ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू (3) मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू... (2) ऐ वतन... मेरे वतन... (2) तू ही मेरी मंजिल है पेहचान तुझी से.. (2) पोहुंचू मैं जहां भी मेरी बुनियाद रहे तू... (2) ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू ऐ वतन... मेरे वतन... (2) आ... आ... तुझपे कोई ग़म की आंच आने नहीं दूं (2) कुर्बान मेरी जान तुझपे शाद रहे तू (2) ऐ वतन वतन मेरे आबाद रहे तू मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू ऐ वतन (2) मेरे वतन (2) ऐ वतन (2) मेरे वतन (2) आबाद रहे तू (2) ऐ वतन मेरे वतन आबाद रहे तू...
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रुक जाना नहीं - Ruk Jana Nahi Lyrics from Imtihan फिल्म / एल्बम : इम्तिहान (1974) संगीत दिया है: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल गीत के बोल: मजरूह सुल्तानपुरी गायक: किशोर कुमार रुक जाना नहीं तू कहीं हार के काँटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के ओ राही, ओ राही (2) नैन आंसू जो लिये हैं ये राहों के दिये हैं (2) लोगों को उनका सब कुछ देके तू तो चला था सपने ही लेके कोई नहीं तो तेरे अपने हैं सपने ये प्यार के सूरज देख रुक गया हैं तेरे आगे झुक गया हैं (2) जब कभी ऐसे कोई मस्ताना निकले हैं अपनी धून में दीवाना शाम सुहानी बन जाते हैं दिन इंतजार के ओ राही ओ राही (2) रुक जाना नहीं तू कहीं हार के काँटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के ओ राही ओ राही (2) साथी ना कारवाँ हैं ये तेरा इम्तिहान हैं यूं ही चला चल दिल के सहारे करती हैं मंजिल तुझ को इशारे देख कही कोई रोक नहीं ले तूझ को पुकार के.. रुक जाना नहीं तू कहीं हार के काँटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के ओ राही ओ राही (2) नैन आंसू जो लिये हैं ये राहों के दिये हैं (2) लोगों को उनका सब कुछ देके तू तो चला था सपने ही लेके कोई नहीं तो तेरे अपने हैं सपने ये प्यार...